सीएआर-टी सेल थेरेपी क्या है?

हाल ही में, आईआईटी बॉम्बे में स्थापित इम्यूनो एडॉप्टिव सेल थेरेपी नामक कंपनी को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से नेक्ससीएआर19/NexCAR19 (Actalycabtagene autoleucel) नामक पहली मानवकृत सीडी-19 लक्षित काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर टी सेल (सीएआर-टी सेल) थेरेपी के लिए मंजूरी मिल गई है। यह आईआईटी बॉम्बे और टाटा मेमोरियल सेंटर (टीएमसी) के बीच एक दशक लंबे सहयोगात्मक प्रयास का परिणाम है।

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सीएआर-टी सेल थेरेपी क्या है?

सीएआर-टी सेल थेरेपी कैंसर के इलाज में एक बड़ी सफलता है। इस थेरेपी में कोई दवा लेने की जरूरत नहीं होती बल्कि मरीज की खुद की टी-सेल्स को प्रयोगशाला में संशोधित किया जाता है। इसका उपयोग रिलैप्स्ड/रिफ्रैक्टरी (आर/आर) बी-सेल लिंफोमा (लसीका तंत्र से उत्पन्न होने वाले कैंसर) और ल्यूकेमिया (डब्ल्यूबीसी उत्पन्न करने वाली कोशिकाओं से उत्पन्न होने वाले कैंसर) के मामलों में किया जाता है।

टीम के सदस्य कौन-कौन थे?

डॉ. अथर्व कारुलकर, डॉ. अलका द्विवेदी और आईआईटी बॉम्बे के एसोसिएट प्रोफेसर राहुल पुरवार के नेतृत्व वाली टीम ने NexCAR19 को डिजाइन और विकसित किया।

सीएआर-टी सेल थेरेपी की प्रक्रिया-

टी-कोशिकाओं को रोगी के रक्त से निकाला जाता है और प्रयोगशाला में, इन टी-कोशिकाओं में एक विशेष रिसेप्टर जिसे काइमेरिक एंटीजन रिसेप्टर (सीएआर) कहा जाता है, जोड़ा जाता है। यह रिसेप्टर रोगी की कैंसर कोशिकाओं में एक विशिष्ट प्रोटीन से जुड़ जाता है। इसके बाद वैज्ञानिक प्रयोगशाला में कई सीएआर-टी कोशिकाएं विकसित करते हैं और इन्हें रोगी के शरीर में डाल दिया जाता है।

सीएआर-टी सेल थेरेपी क्या है?

सीएआर-टी सेल थेरेपी का महत्व-

सीएआर टी-सेल थेरेपी अविश्वसनीय रूप से विशिष्ट है, यह कैंसर से लड़ने के लिए सीधे रोगी की प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करती है। यह लक्षित एजेंटों की तुलना में अधिक सटीक है तथा उच्च नैदानिक ​​प्रभावशील है। इसीलिए इन्हें अक्सर ‘जीवित औषधियाँ’ भी कहा जाता है।

सीएआर-टी सेल थेरेपी के साइड इफेक्ट्स-

  • भ्रम
  • दौरे
  • वाक विकृति
  • बुखार
  • सिरदर्द

निष्कर्ष-

यह थेरेपी कैंसर के इलाज की लागत को कम कर सकती है और बहुत प्रभावी हो सकती है।