चंद्रयान-3 की तरह रूस भी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की तैयारी कर रहा है। रूस की अंतरिक्ष एजेंसी रोस्कोस्मोस ने इसके लिए लूना-25 (लूना-ग्लोब लैंडर) मिशन लॉन्च किया है। लॉन्चिंग 11 अगस्त, 2023 को सुबह 4:40 बजे IST वोस्तोचन कोस्मोड्रोम से हुई। 1976 के बाद से यह रूस का पहला चंद्र मिशन है। संभव है कि यह चंद्रयान-3 के साथ या उससे पहले चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरेगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला पहला देश कौन सा होगा।

ALSO READ- Chandrayaan-3 vs Russia’s Luna-25 in english…

चंद्रयान-3 और लूना-25 के बीच प्रमुख अंतर-

चंद्रयान-3लूना-25
1. इसमें एक लैंडर और एक रोवर है।1. इसमें लैंडर तो है लेकिन रोवर नहीं है।
2. द्रव्यमान: 3900 कि.ग्रा.2. द्रव्यमान: 1800 किलोग्राम साथ ही 31 किलोग्राम के वैज्ञानिक उपकरण
3. इसका कोई स्कूप नहीं है।3. यह चट्टान के नमूने लेने के लिए एक स्कूप का उपयोग करेगा।
4. लैंडिंग साइट(लगभग): अक्षांश: 69S
: देशांतर: 32E
4. लैंडिंग साइट(लगभग): अक्षांश: 69S
: देशांतर: 43E
5. प्रक्षेपण यान: एलएमवी-35. प्रक्षेपण यान: सोयुज-2 फ़्रेगेट
6. यात्रा का समय: 40 दिन (लगभग)6. यात्रा का समय: 11/12 दिन (लगभग)

क्या दोनों चंद्रमा मिशन टकरा सकते हैं या एक-दूसरे के लिए समस्या पैदा कर सकते हैं?

रोस्कोस्मोस ने कहा है कि दोनों मिशन एक-दूसरे के रास्ते में नहीं आएंगे क्योंकि उनकी लैंडिंग साइटें अलग-अलग हैं और चंद्रमा पर दोनों के लिए पर्याप्त जगह है।

निष्कर्ष-

हालाँकि, जहाँ तक रूस का लूना-25, चंद्रयान-3 से पहले चंद्रमा पर उतरने की बात है, तब भी भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश होगा और साथ ही भारत चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर रोवर उतारने वाला पहला देश होगा क्योंकि लूना-25 के पास कोई रोवर नहीं है।