आपने अक्सर देखा होगा कि कुछ असामाजिक तत्व होटल या रेस्टोरेंट में लगे क्यूआर कोड में हेरफेर कर देते हैं। इसलिए, MIT के कंप्यूटर साइंस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस लेबोरेटरी (CSAIL) के शोधकर्ताओं ने एक अदृश्य QR कोड/टैग (BrightMarker) विकसित किया है।

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ब्राइटमार्कर नग्न आंखों के लिए अदृश्य होते हैं, जो उन्हें छेड़छाड़-रोधी बनाता है, लेकिन लोग चीज़ों के बनने से पहले उनमें ब्राइटमार्कर्स जोड़ सकते हैं, वे पहले से बनी हुई वस्तुओं में ब्राइटमार्कर्स नहीं जोड़ सकते। ब्राइटमार्कर्स में फ्लोरोसेंट सामग्री होती है जो उनमें एक विशेष निकट-अवरक्त तरंग दैर्ध्य पर प्रकाश उत्पन्न करने का कारण बनती है। इसी कारण ये अलग ही दिखते हैं और इन्फ्रारेड कैमरों का उपयोग करके इन्हें आसानी से देखा जा सकता है।

एमआईटी के शोधकर्ताओं ने ब्राइटमार्कर्स का पता लगाने के लिए दो हार्डवेयर सेटअप विकसित किए हैं: एक स्मार्टफोन के लिए और दूसरा एआर(AR) और वीआर(VR) हेडसेट के लिए। हार्डवेयर में ब्राइटमार्कर्स को देखने और स्कैन करने की क्षमता है, लॉन्गपास फ़िल्टर आसपास की वस्तुओं को अस्पष्ट कर देगा और एक तीसरा उपकरण केवल प्रतिदीप्ति को देखेगा। ये कुछ उपकरण मिलकर एक क्रांतिकारी प्रणाली बनाते हैं।

ब्राइटमार्कर्स के बारे में कुछ महत्वपूर्ण बातें-

  1. ब्राइटमार्कर्स का उपयोग अंगों की गति को ट्रैक करने के लिए किया जा सकता है।
  2. निर्माता, थोक विक्रेता, खुदरा विक्रेता आदि उत्पाद की गतिविधि के बारे में डेटा प्राप्त करने के लिए ब्राइटमार्कर्स को स्कैन कर सकते हैं।
  3. ब्राइटमार्कर्स का एक अन्य संभावित उपयोग ‘घरेलू सुरक्षा कैमरों में रात्रि दृष्टि निगरानी’ भी है।
  4. इन्फ्रारेडटैग्स और एप्पल के एयरटैग्स की तुलना में इसका उपयोग करना आसान और कम लागत वाला है।

निष्कर्ष-

उम्मीद है कि ब्राइटमार्कर्स तकनीक क्रांतिकारी होगी और निकट भविष्य में निश्चित रूप से हम अपने रोजमर्रा के जीवन में इसका उपयोग देखेंगे।